30 आ’तंकियों ने अकेले गोरखा जवान दीपप्रसाद को घेरा.. उनके बाद वो 30 आ’तंकी कभी उठ नहीं पाए
NEW DELHI: आज पूरी दुनिया में आ’तंकवादियों ने हथियार के दम पर भय का माहौल बना रखा हैं। इन आ’तंकवादियों से हर देश में वहां के सैनिक व सुरक्षा बल अपनी जान जोखिम में डालकर आम जनता व देश की रक्षा करते हैं। वे इन आ’तंकियों से एक टीम के रूप में लगातार भिड़ते रहते हैं लेकिन कई बार कुछ विषम परिस्थितियों में अकेला सैनिक इनके बीच फंस जाता है।
ऐसे ही एक गोरखा सैनिक हैं दीपप्रसाद, जो अकेले तालिबानी आ’तंकवादियों के बीच फंस गये लेकिन इस जांबाज सैनिक ने हार नहीं मानी और अकेले ही 30 आ’तंकियों को ढेर कर दिया। यह वाक्या अफगानिस्तान का है जब सितम्बर 2010 में दीपप्रसाद अपनी चौकी पर अकेले ही तैनात थे और तालिबानी आ’तंकियों ने चौकी को चारों तरफ से घेर लिया। जब दीपप्रसाद को पता चला की वो चारों तरफ से घिर चुके हैं तो वे घबराये नहीं बल्कि अकेले ही मोर्चा संभाल लिया। दोनों तरह से गो’लियों की बोछार होने लगी, ग्रेनेड चलने लगे। दीपप्रसाद ने उन पर 17 ग्रेनेड फैंके और ग्रेनेड ख़त्म होने पर रायफल से आ’तंकियों पर गो’लियों की बोछार कर दी। जब तक उनकी मदद के लिये बाकि सेना पहुंची तब तक वे अकेले ही 30 तालिबानी आ’तंकियों को ढे’र कर चुके थे।
दीपप्रसाद को ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने उनकी इस बहादुरी के लिए ‘बकिंघम पैलेस’ में एक समारोह के दौरान ‘कॉन्सपिक्युअस गैलेंट्री क्रॉस’ पुरस्कार से सम्मानित किया। समारोह में उन्होंने कहा कि जिस तरह से मुझे उन्होंने चारों ओर से घेर लिया था, मैं समझ चुका था कि मेरा मारा जाना तय है। तब सोचा जितने ज्यादा लोगों को मार सकूंगा, मा’रकर ही मरूंगा। उस घटना का अनुभव बताते हुए उन्होंने कहा कि एक तालिबानी लड़ाकू गार्ड हाउस से सटे टावर की ओर चढ़ने की कोशिश कर रहा था, तब मुझे किसी भी तरह से उसे ज़मीन पर गिरा देना था। मैंने उस ल’ड़ाकू को वहां से हटाने में कामयाबी हासिल तो कर ली लेकिन तभी मेरे ह’थियार ने धो’खा दे दिया। गो’ली नहीं चली। मैंने म’शीनग’न का ट्राईपॉड उठाकर तालिबानी के चे’हरे पर दे मा’रा, जिससे दु’श्मन ल’ड़ाकू बिल्डिंग की ज़मीन पर गिर गया।”गोरखा सैनिकों का अपने साहस और निर्भीकता के चलते पूरी दुनिया में एक ख़ास रूतबा हासिल है।
आस-पास नज़रें दौड़ाने पर उन्होंने पाया कि कई तालिबानी आ’तंकियों ने उन्हें चौकी के चारों तरफ से घेर लिया थ।जब दीप प्रसाद को लगा कि वो चारों तरफ से घिर चुके हैं,तो उन्होंने घबराने के बजाए अकेले ही मोर्चा संभाल लिया।दोनों तरह से गो’लियों की ताबड़तोड़ बौछार होने लगी।तालिबानी आ’तंकियों ने उन पर 15 मिनट से ज़्यादा समय तक एके-47 से ताबड़तोड़ हमले किए थे।दीप ने भी आ’तंकियों पर कई राउंड फायरिंग की,कई ग्रेनेड भी फेंके और जब ग्रेनेड ख़त्म हुए,तो रायफल से आ’तंकियों पर गो’लियों की बौछार करनी शुरु कर दी।सेना उनकी मदद के लिए पहुंचती,उससे पहले ही वे 30 तालिबानी आ’तंकियों को ढेर कर चुके थे।